आदरणीय दाहिया जी का आभार कि उन्होंने आज नवगीतों के स्तम्भों में से एक कीर्तशेष डा० शिव बहादुर सिंह भदौरिया जो के नवगीतों से परिचय कराया। यह भी एक सुखद संयोग कि "राघव रंग" के संपादक आदरणीय निर्मल शुक्ल आज मेरे घर पधारे और डा० साहब के नवगीतों तथा राघव रंग के प्रकाशन की पृष्ठभूमि सहित उस समय के नवगीत रचनाकर्म की विशद जानकारी मिली। इन आठों नवगीतों पर मनोज जैन मधुर जी, व्योम जी, धनंजय सिंह, देवेन्द्र सफल जी, राजा अवस्थी जी, ब्रजनाथ श्रीवास्तव जी, रामबाबू रस्तोगी समेत सुविग्य गीत नवगीत मनीषियों के विवेचन के सामने मेरी टिप्पणी खास मायने नही रखती। इतना जरूर कहना चाहूंगा कि नवगीतों में लोक की इतनी प्रभावी और जीवन्त उपस्थिति मैंने पहले कभी नही देखी। राघव रंग पढनी ही पडेगी। आभार दाहिया जी।
-रामशंकर वर्मा
No comments:
Post a Comment