-रामबाबू रस्तोगी
फिर हवा के साथ
कुछ संवाद करने आ रहे हैं
गाँव के बरगद पुराने
स्थगित आवागमन-
क्यों ख़ुशबुओं का.
किसलिये फूला हुआ -
मुँह दोस्तों का
बैठ कर फिर
रेशमी दिन, याद करने
याद करने चाँदनी
ओढ़े ज़माने
प्रेत-बाधा से ग्रसित हैं
आस्थायें
भूमिका लिखवा रहीं
ख़ुद भूमिकायें
हांफती-रोती
सदी से बात करने
बात करने,
घाव पर मरहम लगाने
धूप-दीपक,आरती,
अनुराग-चंदन
अल्पना-शुभकामना
आशीष-वंदन
शुष्क आँखों में
चमकते रंग भरने
रंग भरने,
रंग का मतलब बताने
-रामबाबू रस्तोगी
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