[ पांच ]
अनुचि हो या उचित
यहाँ सब चलता है
चिल्लाता है
वही कि-
जिसका घर जलता है
माना कि धर्म
काटों के बाँट नकली हैं
लेकिन बन्धु!
वस्तुएँ क्या असली हैं
तकरीबन सबके
हाथ में जाल है
गौरतलब यह कि
कौन किससे फँसता है
भरे पेटों की
कुशलता ने हथिया ली
त्रासदी छिपाने की
तकनीक-व-प्रणाली
पिछली दुर्घटनाएँ
नेपथ्य में गईं
ताज़ाखबरों
से परिदृश्य बदलता है
झोपड़ियों की
रकम,पाण्डालों ने हड़पी
जीना
दूभर हुआ
एक जुबान तड़पी
संगीन व
अपराध है
प्रतिरोध में प्रमाद
विकलांग-भविष्य
कभी किसी
को छमा नहीं करता है
-डॉ.शिवबहादुर सिंह भदौरिया
यहाँ सब चलता है
चिल्लाता है
वही कि-
जिसका घर जलता है
माना कि धर्म
काटों के बाँट नकली हैं
लेकिन बन्धु!
वस्तुएँ क्या असली हैं
तकरीबन सबके
हाथ में जाल है
गौरतलब यह कि
कौन किससे फँसता है
भरे पेटों की
कुशलता ने हथिया ली
त्रासदी छिपाने की
तकनीक-व-प्रणाली
पिछली दुर्घटनाएँ
नेपथ्य में गईं
ताज़ाखबरों
से परिदृश्य बदलता है
झोपड़ियों की
रकम,पाण्डालों ने हड़पी
जीना
दूभर हुआ
एक जुबान तड़पी
संगीन व
अपराध है
प्रतिरोध में प्रमाद
विकलांग-भविष्य
कभी किसी
को छमा नहीं करता है
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